नीतीश कुमार और राबड़ी देवी ने महिला आरक्षण पर अपना रुख स्पष्ट किया

नीतीश कुमार और राबड़ी देवी ने महिला आरक्षण पर अपना रुख स्पष्ट किया

संसद में पेश महिला आरक्षण बिल (महिला शक्ति वंदन अधिनियम) पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने अपनी-अपनी बात रखी है।

संसद में पेश महिला आरक्षण बिल (महिला शक्ति वंदन अधिनियम) पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने अपनी-अपनी बात रखी है। नीतीश ने जहां कुछ शर्तों के इसका स्वागत किया, वहीं राबड़ी देवी ने इसे धोखा बताया है। हालांकि, दोनों ने आरक्षण में आरक्षण की मांग की मांग की है।

नीतीश कुमार ने कहा कि महिला आरक्षण के दायरे में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति की तरह पिछड़े और अतिपिछड़े वर्ग की महिलाओं के लिये भी आरक्षण का प्रविधान किया जाना चाहिए। नीतीश कुमार ने ट्वीट कर कहा, “संसद में जो महिला आरक्षण बिल लाया गया है, वह स्वागत योग्य कदम है। हम शुरू से ही महिला सशक्तीकरण के हिमायती रहे हैं और बिहार में हमलोगों ने कई ऐतिहासिक कदम उठाए हैं। वर्ष 2006 से हमने पंचायती राज संस्थाओं और वर्ष 2007 से नगर निकायों में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया।”

उन्होंने कहा, “वर्ष 2006 से ही प्रारंभिक शिक्षक नियोजन में महिलाओं को 50 प्रतिशत और वर्ष 2016 से सभी सरकारी नौकरियों में 35 प्रतिशत आरक्षण दिया जा रहा है। वर्ष 2013 से बिहार पुलिस में भी महिलाओं को 35 प्रतिशत आरक्षण दिया जा रहा है। आज बिहार पुलिस में महिला पुलिसकर्मियों की भागीदारी देश में सर्वाधिक है।”

मुख्यमंत्री ने बताया कि बिहार में मेडिकल एवं इंजीनियरिंग यूनिवर्सिटी के अन्तर्गत नामांकन में न्यूनतम 33 प्रतिशत सीटें छात्राओं के लिये आरक्षित की गई हैं। ऐसा करनेवाला बिहार देश का पहला राज्य है।
हमलोगों ने वर्ष 2006 में राज्य में महिला स्वयं सहायता समूहों के गठन के लिए परियोजना शुरू की जिसका नामकरण ‘जीविका’ किया। बाद में तत्कालीन केन्द्र सरकार द्वारा इसकी तर्ज पर महिलाओं के लिए आजीविका कार्यक्रम चलाया गया।

उन्होंने आगे लिखा, “बिहार में अब तक 10 लाख 47 हजार स्वयं सहायता समूहों का गठन हो चुका है जिसमें 1 करोड़ 30 लाख से भी अधिक महिलाएँ जुड़कर जीविका दीदियाँ बन गई हैं। हमारा मानना है कि संसद में महिला आरक्षण के दायरे में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति की तरह पिछड़े और अतिपिछड़े वर्ग की महिलाओं के लिये भी आरक्षण का प्रावधान किया जाना चाहिये।”

उन्होंने आखिर में लिखा है, “प्रस्तावित बिल में यह कहा गया है कि पहले जनगणना होगी तथा उसके पश्चात निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन होगा तथा इसके बाद ही इस प्रस्तावित बिल के प्रावधान लागू होंगे। इसके लिए जनगणना का काम शीघ्र पूरा किया जाना चाहिए। जनगणना तो वर्ष 2021 में ही हो जानी चाहिए थी परन्तु यह अभी तक नही हो सकी है।”

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि जनगणना के साथ जातिगत जनगणना भी करानी चाहिए तभी इसका सही फायदा महिलाओं को मिलेगा। यदि जातिगत जनगणना हुई होती तो पिछड़े एवं अतिपिछड़े वर्ग की महिलाओं के लिए आरक्षण की व्यवस्था को तुरंत लागू किया जा सकता था।

उधर, बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने कहा कि महिला आरक्षण के अंदर वंचित, उपेक्षित, खेतिहर एवं मेहनतकश वर्गों की महिलाओं की सीटें आरक्षित होनी चाहिए। यह नहीं भूलना चाहिए कि महिलाओं की भी जाति होती है।

वहीं, राजद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी ने कहा है कि विपक्षी दलों की एकजुटता से बेचैन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिला आरक्षण बिल पेश किया है। उन्होंने कहा कि यह भ्रम नहीं होना चाहिए कि मोदी महिलाओं के प्रति संवेदनशील हो गए हैं। हाल में हम सबने ने महिला पहलवानों के मामले में केंद्र सरकार के संवेदनहीना को देखा है।

उन्होंने कहा कि इस बिल के बहाने नरेंद्र मोदी लोकसभा चुनाव की वैतरणी पार करना चाहते हैं। लेकिन, इस आरक्षण के भीतर पिछड़ी जाति की महिलाओं के लिए आरक्षण का प्रावधान नहीं करके मोदी सरकार ने अपना पिछड़ा विरोधी चरित्र ही उजागर किया है।

तिवारी ने कहा कि राजद ने कभी महिला आरक्षण का विरोध नहीं किया है। हम हमेशा सार्वजनिक जीवन में महिलाओं की भागीदारी का समर्थक रहे हैं। हम सिर्फ़ महिलाओं के आरक्षण के भीतर पिछड़ी जाति की महिलाओं के लिए आरक्षण चाहते हैं। इससे पहले भी जब महिलाओं के आरक्षण का मामला आया है, राजद ने इसी संशोधन के साथ उसके समर्थन का एलान किया है।