मानवाधिकार आयोग ने मणिपुर जेल से म्यांमार के 75 नागरिकों को बाहर निकाला

मानवाधिकार आयोग ने मणिपुर जेल से म्यांमार के 75 नागरिकों को निकाला

मणिपुर मानवाधिकार आयोग (एमएचआरसी) ने सजीवा स्थित केंद्रीय जेल के लगभग 75 कैदियों को फॉरेन डिटेंशन सेंटर (एफडीसी) में ट्रांसफर कर दिया है। पहले पांच दिनों तक निरीक्षण किया गया इसके बाद ये एक्शन लिया गया।

मणिपुर मानवाधिकार आयोग (एमएचआरसी) ने सजीवा स्थित केंद्रीय जेल के लगभग 75 कैदियों को फॉरेन डिटेंशन सेंटर (एफडीसी) में ट्रांसफर कर दिया है। पहले पांच दिनों तक निरीक्षण किया गया इसके बाद ये एक्शन लिया गया। ये सभी म्यांमार के नागरिक हैं। दिप्रिंट वेब साइट के मुताबाकि, जेल अधीक्षक एस।के। भद्रिका ने बताया कि सजीवा डिटेंशन सेंटर में 30 महिला शरणार्थियों को जल्द ही इंफाल सेंट्रल जेल के पास दूसरे केंद्र में ट्रांसफर कर दिया जाएगा।

उन्होंने आगे कहा कि एक गर्भवती महिला को इलाज के लिए इंफाल स्थित जवाहरलाल नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में भर्ती कराया गया हैं। पिछले शुक्रवार को एमएचआरसी की दो सदस्यीय टीम; जिसके अध्यक्ष न्यायमूर्ति यू।बी। साहा और सदस्य के।के। सिंह थे, एक कानून अधिकारी के साथ, इंफाल पूर्वी जिले के सजीवा में मणिपुर सेंट्रल जेल का निरीक्षण करने पहुंचे थे। जब वह निरीक्षण कर रहे थे उसी वक्त आस-पास के डिटेंशन सेंटर में बंद म्यांमार के नागरिक चिल्ला रहे थे। निरीक्षण करने पहुंचे अधिकारियों ने उनकी हताशापूर्ण दलीलें सुनीं।

यह ऐसे समय में आया है जब मणिपुर सरकार म्यांमार से पहचाने गए अवैध अप्रवासियों के बायोमेट्रिक्स इकट्ठा कर रही हैं। यह चंदेल जिले से शुरू हुआ था और इस सप्ताह की शुरुआत में सीमावर्ती जिले टेंग्नौपाल में किया गया। राज्य फिलहाल पिछले चार महीनों से आदिवासी कुकी और गैर-आदिवासी मैतेई समुदायों के बीच नैतिक संघर्ष की चपेट में हैं। इस हिंसा के चलते लगभग 180 लोगों की जान जा चुकी है और हजारों लोग विस्थापित हुए हैं। पिछले 48-72 घंटों में आठ लोगों की मौतों की सूचना मिली हैं।

दरअसल, शुक्रवार के निरीक्षण का आदेश एमएचआरसी के अध्यक्ष साहा की ओर से 28 अप्रैल को दिया था, जिसमें इस बात पर जोर दिया गया था कि जेल अधिकारियों को म्यांमार के कैदियों को उनकी सजा पूरी करने और जुर्माना जमा करने के बाद तुरंत रिहा कर देना चाहिए, ताकि उन्हें या तो उनके देश भेजा जा सके या फॉरेन डिटेंशन सेंटर में रखा जा सकें।

लेकिन निरीक्षण के दौरान, एमएचआरसी की टीम ने पाया कि जेल के कुछ कैदियों को उनकी सजा पूरी होने के बाद भी केंद्रीय जेल में अवैध रूप से हिरासत में रखा गया था। म्यांमार के एक नागरिक को 2018 से जबकि कई अन्य को 2021 से सजा काटते हुए पाया गया।

इंफाल के एक वकील ने बताया, “राज्य सरकार की नजर में वे अवैध अप्रवासी हैं, और इसलिए उन्हें जेल में बंद रखा गया है। राज्य उन्हें शरणार्थी नहीं मान सकता क्योंकि उन्हें विदेशी अधिनियम, 1946 के तहत दोषी ठहराया गया था, लेकिन वे पहले ही साल छह महीने की सजा भुगत चुके हैं और उन्हें जेल से रिहा किया जाना चाहिए। या फिर उनके वापस लौटने तक उन्हें डिटेंशन सेंटर में रखा जाना चाहिए।”

एमएचआरसी द्वारा निरीक्षण किया गया एफडीसी वही केंद्र है जहां जनवरी में 32 वर्षीय म्यांमार के नागरिक लामखोचोन गुइटे की मृत्यु हो गई थी। जिसके बाद शरणार्थी अधिकारों के लिए काम करने वाले अधिकार समूहों की ओर से काफी आपत्ति जताई गई थी। म्यांमार के तमू टाउनशिप के सयारसन गांव के लामखोचोन गुइटे को 70 अन्य म्यांमार नागरिकों के साथ हिरासत में रखा गया था, जिन्हें 27 जनवरी को तेंगनौपाल जिले के मोरेह उप-मंडल से गिरफ्तार किया गया था।

डिटेंशन सेंटर में अधिकांश म्यांमार के नागरिक आजीविका की तलाश में भारत आए थे। कुछ लोग कोविड-19 महामारी से पहले आए थे और कई फरवरी 2021 के सैन्य तख्तापलट के बाद से जुंटा के अत्याचारों से भाग कर आए थे। साल 2021 में म्यांमार में नोबेल पुरस्कार विजेता आंग सान सू की चुनी हुई सरकार को सत्ता से हटा दिया था।