अडानी ग्रुप पर हुई हिंडनबर्ग जैसी एक और बमबारी, मार्केट में हलचल

अडानी ग्रुप पर हुई हिंडनबर्ग जैसी एक और बमबारी, मार्केट में हलचल तेज

हिंडनबर्ग के बाद अब गौतम अडानी समूह पर ऑर्गेनाइज्ड क्राइम एंड करप्शन रिपोर्टिंग प्रोजेक्ट (OCCRP) नाम की एक ग्लोबल संस्था ने गड़बड़ी के आरोप लगाए हैं। इस रिपोर्ट को हिंडनबर्ग 2.0 नाम दिया गया है।

हिंडनबर्ग के बाद अब गौतम अडानी समूह पर ऑर्गेनाइज्ड क्राइम एंड करप्शन रिपोर्टिंग प्रोजेक्ट (OCCRP) नाम की एक ग्लोबल संस्था ने गड़बड़ी करने का आरोप लगाया है। इस रिपोर्ट को हिंडनबर्ग 2.0 नाम दिया गया है। OCCRP की रिपोर्ट में बताया गया है कि प्रमोटर परिवार के बिजनेस पार्टनर्स ने मॉरीशस स्थित ‘गुमनाम’ निवेश फंडों के माध्यम से अडानी समूह के शेयरों में करोड़ों डॉलर का निवेश किया था।

अपनी रिपोर्ट में OCCRP ने कहा है कि इसकी जांच में कम से कम दो मामले पाए गए जहां गुमनाम निवेशकों ने ऐसी ऑफश्योर स्ट्रक्चर के माध्यम से अडानी ग्रुप के स्टॉक खरीदा और बेचा। इसमें अडानी ग्रुप के मॉरीशस मे किए गए ट्रांजैक्शंस की डीटेल का पहली बार खुलासा किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, ग्रुप की कंपनियों ने 2013 से 2018 तक गुपचुप तरीके से अपने शेयरों को खरीदा।

नॉन-प्रॉफिट मीडिया ऑर्गेनाइजेशन OCCRP का दावा है कि उसने मॉरीशस के रास्ते हुए ट्रांजैक्शंस और अडानी ग्रुप के इंटरनल ईमेल्स को देखा है। उसका कहना है उसकी जांच में सामने आया है कि कम से कम दो मामले ऐसे हैं जहां निवेशकों ने विदेशी कंपनियों के जरिए अडानी ग्रुप के शेयर खरीदे और बेचे हैं।

यह रिपोर्ट गुरुवार को आई थी। OCCRP की रिपोर्ट में दो निवेशकों नसीर अली शाबान अहली और चांग चुंग-लिंग का नाम लिया गया है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ये लोग अडानी परिवार को लॉन्गटाइम बिजनस पार्टनर्स हैं और उसने अपनी रिपोर्ट में इन्हीं दोनों की जांच की है। मीडिया संस्था ने दावा किया है कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि चांग और अहली ने जो पैसा लगाया है वह अडानी परिवार ने दिया था लेकिन रिपोर्टिंग और डॉक्यूमेंट्स से साफ है कि अडानी ग्रुप में उनका निवेश अडानी परिवार के साथ सामंजस्य के साथ किया गया था।

OCCRP का कहना है कि सवाल यह है कि यह अरेंजमेंट कानूनों का उल्लंघन है या नहीं, यह इस बात कर निर्भर करता है कि क्या अहली और चांग प्रमोटर्स की तरफ से काम कर रहे हैं या नहीं। अडानी ग्रुप में अडानी ग्रुप ही प्रमोटर है। अगर ऐसा है तो अडानी होल्डिंग्स में उनकी हिस्सेदारी 75 परसेंट से अधिक हो जाएगी। इस मामले में अहली और चांग ने OCCRP के न्यूज आर्टिकल पर कमेंट नहीं किया।

OCCRP ने गार्डियन अखबार को दिए एक रिपोर्टर को दिए इंटरव्यू में कहा कि चांग का कहना था कि उन्हें गुपचुप तरीके से अडानी ग्रुप के शेयरों को खरीदे जाने के बारे में कोई जानकारी नहीं है। उनका कहना था कि जर्नलिस्ट्स की उनके दूसरे निवेशों में क्यों दिलचस्पी नहीं है। उन्होंने कहा, ‘हम सिंपल बिजनस में हैं।’

यहां जानना जरूरी है कि OCCRP संस्था को अरबपति जॉर्ज सोरोस और रॉकफेलर ब्रदर्स फंड जैसे संस्थाओं की ओर फंडिंग मिलती है। जॉर्ज सोरोस वही अरबपति हैं, जो समय-समय पर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की आलोचना करते रहते हैं। जनवरी महीने में अमेरिका की शॉर्ट सेलर फर्म हिंडनबर्ग ने भी ऐसे ही आरोप लगाए थे। हिंडनबर्ग ने कहा था कि अडानी ग्रुप ने शेल कंपनियों के जरिए शेयरों में गड़बड़ी की है। इसके अलावा ऑडिट और कर्ज समेत कई अन्य मुद्दों पर भी समूह को घेरा था। अडानी समूह ने हिंडनबर्ग के दावों को भ्रामक और बिना सबूत वाला बताया और कहा कि उसने हमेशा कानूनों का अनुपालन किया है।