शरद पवार ने ही अजित पवार को BJP से बात करने दिल्ली भेजा: छगन भुजबल

शरद पवार ने ही अजित पवार को BJP से बात करने दिल्ली भेजा: छगन भुजबल

महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री एवं राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के नेता अजित पवार ने कहा कि राजनीति में कोई भी स्थायी दोस्त या दुश्मन नहीं होता है।

महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के नेता अजित पवार ने कहा कि राजनीति में कोई भी स्थायी दोस्त या दुश्मन नहीं होता है। मुंबई से लगभग 390 किलोमीटर दूर बीड में एक रैली को संबोधित करते हुए पवार ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के करिश्मे से धर्मनिरपेक्ष विचारों पर चलने वाले महाराष्ट्र को फायदा होगा।

अजित पवार ने राज्य मंत्रिमंडल में उन्हें और उनकी पार्टी के नेताओं को शामिल करने के लिए शिवसेना और भारतीय जनता पार्टी के स्थानीय नेताओं का शुक्रिया अदा किया। उन्होंने कहा, “राजनीति में कोई भी स्थाई दोस्त या दुश्मन नहीं होता। ये राजनीति है।” उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का करिश्मा पूरे देश में देखा जाता है और उम्मीद है कि धर्मनिरपेक्ष विचारों पर चलने वाले महाराष्ट्र को इस करिश्मे से फायदा होगा।

उधर, पूर्व में एनसीपी के प्रमुख शरद पवार के सबसे करीबी सहयोगियों में रहे छगन भुजबल सनसनीखेज खुलासा किया है। बीड रैली में शरद पवार पर आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि सीनियर पवार ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का उपयोग करके पहले भाजपा के साथ बातचीत की और बाद में पीछे हट गए।

भुजबल ने कहा, “मैं आपसे 2014 से आज तक की घटनाओं के बारे में पूछना चाहता हूं। आपने अजित पवार, प्रफुल्ल पटेल, जयंत पाटिल को दिल्ली जाने, चर्चा करने और मंत्री पद के साथ-साथ विधायक और सांसद की सीटें भी मांगने को कहा। यहां तक कि जयंत पाटिल भी उस सूची में थे, अब क्या हुआ?”

उन्होंने आरोप लगाया कि जो लोग पवार के मंच से भाषण दे रहे हैं, वे सभी भाजपा से हाथ मिलाने वाले पत्र पर हस्ताक्षरकर्ता हैं। यह भुजबल का विधानसभा क्षेत्र येओला था, जहां अजित पवार और उनके समर्थक नेताओं के विद्रोह के बाद पार्टी का पुनर्निर्माण करने की घोषणा के बाद पवार ने पहली सार्वजनिक रैली की थी।

भुजबल ने आरोप लगाते हुए कहा, “येओला में, आपने मुझे टिकट देने के लिए लोगों से माफ़ी मांगी। लेकिन उस स्थिति में आप कितनी बार माफ़ी मांगेंगे? भंडारा से कोल्हापुर तक? क्योंकि सभी 54 तैयार थे। यह आप ही थे जिन्होंने हमें यह रास्ता दिखाया।”

उन्होंने आगे कहा, “यहां एकत्र हुए लोग अपने आप में इस बात का सबूत हैं कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) अजित दादा के साथ है और राकांपा अध्यक्ष अजित दादा हैं।” उन्होंने दोहराया कि सभी राकांपा विधायकों ने भाजपा को समर्थन देने वाले एक पत्र पर हस्ताक्षर किए थे, उन्होंने दावा किया कि यह शरद पवार ही हैं जो 2014 से हमें भाजपा की ओर धकेलने का यह तरीका दिखा रहे हैं।